हमारे देश में ऐसे कई लोग हैं जो कड़ी मेहनत और लगन के दम पर आर्थिक स्थितियों को पीछे छोड़ते हुए अपने लक्ष्य तक पहुंचे हैं. इन्हीं में से एक हैं, IFS ऑफिसर Balamurugan. इनकी यात्रा कई मुश्किलों से निकली लेकिन आज ये अपने लक्ष्य तक पहुंच गए हैं और लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं.

चेन्नई के रहने वाले हैं बाला

P Balamurugan वो मूलरूप से Keelkattalai चेन्नई के रहने वाले हैं. कम उम्र में ही उन्होंने अपने परिवार का खर्चा चलाना शुरु कर दिया था. परिवार का खर्चा चलाने के लिए अखबार बेचते थे. उनके पिताजी उनकी माताजी को छोड़कर चले गए थे. परिवार में मां के अलावा सात भाई बहन थे. उनकी मां को घर चलाने और बच्चों को पढ़ाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती थी. उनके पास जमीन भी थी. पहले तो जमीन बिक गई लेकिन धीरे-धीरे मां के गहने भी बेचने पड़े. पांच बहने, मां और उनके भाई सभी दो कमरों में मिलकर रहते थे. उन्होंने बताया कि, उनकी मां ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं है लेकिन उनकी सोच बहुत बड़ी है. वह भी यही चाहती थी कि उनके बच्चे पढ़े लिखे और अच्छी से अच्छी नौकरी हासिल करें.

बालामुरुगन आज अपने मेहनत और लगन से आई एफ एस ऑफिसर बन चुके हैं वह राजस्थान के donDungarpurgar forest division में नौकरी कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि, ”जब उन्होंने एक न्यूज़वेंडर से पूछा तो उसने बताया कि ₹90 महीना खर्चा करना पड़ेगा. पैसा न होने के कारण उन्होंने न्यूजपेपर वेंडर में जॉब शुरू कर दी. नौकरी में उन्हें ₹300 मिलते थे. कभी-कभी उनके परिवार को ऐसे दिन भी देखने पड़े जब वह खाने के बिना ही सो जाते थे, लेकिन पढ़ाई के बिना कभी नहीं सोते हैं”.

 

उन्होंने साल 2011 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद ने टीसीएस में नौकरी मिली. इसी दौरान उनकी जमीन पर किसी राजनीतिक शख्सियत ने कब्जा करने की योजना बना ली. 10 सीट की जमीन बचने वाली थी, जिसमें एक लेडीस आईएएस ऑफिसर ने उनकी काफी सहायता की. उन्होंने शिकायत भी दर्ज करवाई. जिस पर कार्यवाही हुई इस दिन में पता चल गया कि एक गुड गवर्नेंस कितना जरूरी होता है. इसके बाद उन्हें विदेश जाने का भी मौका मिला था, लेकिन उन्होंने मन बना लिया था कि अब वह सिविल सर्विसेज करेंगे. वह विदेश गए और काम करके पैसे इकट्ठे किए. अपने सेविंग साथ लेकर फिर वापस आ गए और उन्होंने सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी.

 

वो परीक्षा 3 वर्षों तक नहीं क्लियर कर पाए लेकिन उन्होंने मेहनत करना नहीं छोड़ा. साल 2018 में एग्जाम दिया और क्लियर किया साल 2019 में वह आई एफ एस कैडर के तहत भर्ती हो गए. इनकी कहानी बहुत ही दर्दनाक है लेकिन प्रेरणादायक है. बचपन में पिता छोड़ कर चले गए लेकिन फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी.