अनाथ, अकेलेपन परेशानी की जिंदगी जी कर और कड़ी मेहनत कर के जब आप कोई मुकाम हासिल करते हैं और फिर छोटी सी गलतफहमी से अचानक सब खत्म हो जाए तो बहुत ही बुरा महसूस होता है. इस दुख का अंदाजा कोई भी नहीं लगा सकता. ये वही समझ सकता है जो इस दुख से गुजर चुका हो.

आईआईटी बॉम्बे में पढ़ाई करने की इच्छा रखने वाले एक अनाथ छात्र के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है. आगरा के निवासी सिद्धांत बत्रा के पिता की काफी साल पहले ही मृत्यु हो गई थी. मां ने अकेले ही उनकी परवरिश की थी. 2 साल पहले उनकी मां का भी निधन हो गया था. ऐसे मुश्किल हालातों में सिद्धांत बत्रा ने कड़ी मेहनत कर के JEE एग्जाम में ऑल इंडिया रैंक 270 हासिल की थी. इतना सब कुछ हासिल करने के बाद उनकी एक छोटी सी गलती से उनके हाथ से आईआईटी बॉम्बे में कदम रखने का मौका हाथ से निकल गया.

 

सुप्रीम कोर्ट में लगाई न्याय की गुहार

जानकारी के मुताबिक, आगरा के रहने वाले सिद्धांत बत्रा को आईआईटी बॉम्बे में अपने मनचाहे कोर्स की सीट हासिल हो गई थी, लेकिन उन्होंने एक गलतफहमी के चलते गलत लिंक पर क्लिक कर दिया. जिसके बाद वह अपनी सीट गवा बैठे हैं. इतना बड़ा मौका हाथ से निकल जाना उनके लिए बहुत ही दुख दाई था. इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से न्याय की गुहार भी लगाई है. सिद्धांत बत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में यह कहते हुए अपील की कि उनके लिए एक एक्स्ट्रा सीट बढ़ा कर दी जाए. फिलहाल उनकी इस अपील पर मंगलवार को सुनवाई हुई.

कैसे खो दी सिद्धांत ने सीट

सिद्धांत बत्रा आगरा में अपने नाना नानी के साथ रहते हैं. उन्हें अनाथ पेंशन भी मिलती है. जेईई में अच्छी रैंक आने पर उन्हें आईआईटी बॉम्बे में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी टेक की सीट भी मिल गई थी. 18 अक्टूबर को वह सीट बंटवारे के पहले राउंड को भी पूरा कर चुके थे. 31 अक्टूबर के दिन अपने रोल नंबर की अपडेट देखते समय उनको एक लिंक दिखाई दिया, इस लिंक पर लिखा था कि, ‘सीट निर्धारण और अगले राउंड से विड्रॉ’. सिद्धांत बत्रा को लगा कि, इस लिंक पर क्लिक करने से उन्हें मनचाही सीट मिल सकती है और अगले राउंड की जरूरत भी नहीं पड़ेगी. 10 नवंबर के दिन सिद्धार्थ बत्रा को पता चला कि उनका नाम इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग कोर्स में प्रवेश पाने वाले छात्रों के लिस्ट से हटा दिया गया. दरअसल इस कोर्स के लिए पूरी 93 सीटें थी.

 

बॉम्‍बे हाईकोर्ट में भी हुई सुनवाई

अपनी सीट खो देने के बाद उन्होंने मुंबई हाई कोर्ट में अपील है की थी. हाईकोर्ट में इस पर 19 नवंबर को सुनवाई हुई थी. इसमें अदालत ने आईआईटी से सिद्धांत की अपील पर विचार के लिए भी कहा. IIT ने कहा कि, ” नियमों के तहत संस्थान को ऐसा करने का अधिकार ही नहीं है. प्रवेश के लिए अब सिद्धांत को अगले साल फिर से परीक्षा देनी होगी”. फिलहाल अब इस मामले पर सिद्धांत बत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई है.